
देहरादून। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने राहुल गाँधी के छात्रों से संवाद कार्यक्रम को पहले से तैयार स्क्रिप्ट बताया उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में सफल 11 लाख से अधिक छात्रों का हौसला बढ़ाने का समय था , लेकिन राहुल ने रटे रटाए झूठ फैलाने में गंवा दिया। राहुल ने ऐसा कुछ भी नया नहीं कहा, जिससे लगा 20 दिन के अपने विदेश दौरे में नया सीख कर आएं हों।
उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि कांग्रेसी युवराज नॉन सीरियस और पार्ट टाइम राजनेता हैं। छात्रों की गूंज कार्यक्रम को कांग्रेसी राजनीति का फ्लॉप शो करारा दिया है और तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों पर निशाना लगाना चाहती है। कार्यक्रम, छात्रों से संवाद का नहीं, बल्कि राज्य में अपना जनाधार खो चुकी कांग्रेस और राहुल गांधी को स्थापित करने की एक हताश कोशिश भर है।
पूर्व नियोजित सवाल और पूछने वालों को जवाब भी पहले की तरह ज़बाब भी रटा रटाया मिला। जिसमें नीट परीक्षा को लेकर वही झूठ, भ्रम और अफवाह फैलाने की कोशिश की हैं।
उन्होंने राहुल पर तंज कसा कि 21 जून को नीट परीक्षा पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई और राहुल विदेश चले गए। जब लौटे तब तक परीक्षा का परिणाम भी आ गए और 11 लाख से अधिक छात्रों को सफलता हासिल हुई है। लेकिन लगता है कि छुट्टी के इन 20 दिनों में राहुल के हाथ कुछ भी महत्वपूर्ण और नकारत्मक जानकारी नहीं लगी। यही वजह है कि परीक्षा प्रणाली और भर्ती प्रक्रिया को लेकर देहरादून में पुनः झूठ और अफवाह फैलाने का काम किया।
लेकिन देवभूमि के छात्र एवं युवा बहुत समझदार एवं जागरूक हैं उन्होंने कटाक्ष किया कि जनता को अपेक्षा थी कि राहुल गांधी हमारे इस मुद्दे पर कांग्रेस के काले इतिहास को लेकर पूछे गए और सवालों का ज़बाब भी देते।
नारायण दत्त तिवारी और हरीश रावत सरकार में हुए पटवारी, दरोगा, बीडीओ, टेक्निकल यूनिवर्सिटी, सिडकुल, आयुर्वेद यूनिवर्सिटी आदि भर्ती घोटालों को लेकर भी कुछ कहते। बताया कि जिस राजस्थान से अभियान की शुरुआत हुई , वहां उनकी गहलौत सरकार पेपर लीक के चलते क्यों गई? वहीं व्यंग किया कि चलो इसी बहाने देवभूमि को पता चल गया कि फिक्स सवालों और रिफिक्स जवाबों का फिक्स्ड ड्रामा कैसा होता है।
राहुल गाँधी उत्तराखंड में युवाओं के कल्याण के लिए नहीं, बल्कि चुनाव की आहट सुनकर यहां आए हैं, उत्तराखंड की समझदार जनता और युवा अब कांग्रेस की पुरानी चाल को अच्छी तरह समझ चुके हैं। देवभूमि के प्रति राहुल गांधी की संजीदगी का अंदाजा से लगाया जा सकता है कि इसी बीते 4 जून को जब वे उत्तराखंड आए थे, तो महज कुछ घंटों के ‘सैर-सपाटे’ के बाद तुरंत अंडमान में छुट्टियां मनाने और स्कूबा डाइविंग के लिए निकल गए। उसके बाद 20 दिन विदेश में छुट्टी मनाने के बाद यहां पहुंचे हैं, लिहाजा राहुल गांधी के लिए देवभूमि आना यहां जनता की फिक्र नहीं बल्कि राजनेतिक पर्यटन जैसा है|
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा सरकार देवभूमि से नकल पेपर लीक के सिस्टम का समूल नाश कर चुकी है। कठोरतम नकल निरोधक कानून के संरक्षण में निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड 34 हजार से अधिक भर्तियां हुई है। सैकड़ो नकल माफिया जेल की सलाखों के पीछे हैं और युवाओं का नियुक्ति प्रक्रिया के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।



