
हरिद्वार। सावन माह के शुभारंभ के साथ ही आज से कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है। देशभर के विभिन्न राज्यों से लाखों शिवभक्त हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख, ऋषिकेश और अन्य गंगा घाटों पर पहुंचकर पवित्र गंगाजल भर रहे हैं। इसके बाद श्रद्धालु उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करेंगे।
क्यों निकाली जाती है कांवड़ यात्रा?
धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष की तपन को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। इसी परंपरा को निभाते हुए सावन मास में श्रद्धालु गंगाजल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
इन शहरों में विशेष व्यवस्था
कांवड़ यात्रा को लेकर हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, रुड़की, कोटद्वार, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गाजियाबाद, दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों में व्यापक तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यात्रा मार्गों पर विश्राम शिविर, पेयजल, भोजन, शौचालय, स्नान की व्यवस्था, मोबाइल चिकित्सा इकाइयां, एम्बुलेंस, हेल्प डेस्क व सूचना केंद्र बनाए गए हैं। कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी नि:शुल्क भोजन, पानी और चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।

पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए यात्रा मार्गों, हर की पैड़ी, प्रमुख घाटों और शिव मंदिरों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग की गई है तथा क्विक रिस्पॉन्स टीम, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और यातायात पुलिस को भी तैनात किया गया है।
यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है। पुलिस ने श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्गों का पालन करने, यातायात नियमों का अनुपालन करने तथा किसी भी आपात स्थिति में पुलिस हेल्पलाइन से संपर्क करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।



