
देहरादून। उत्तराखंड में नीट यूजी के जरिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस दाखिले से जुड़े फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला सामने आया है। मामले में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। जाति और क्षेत्र के आधार पर जारी किये जा रहे मामलों को उजागर करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने कहा कि वो इस मामले को लंबे समय से उठा रहे हैं, उन्होंने शासन-प्रशासन ने इस मामले में जांच की मांग की है।
इन दिनों देश भर में नीट यूजी के तहत एमबीबीएस के दाखिले चल रहे हैं। उत्तराखंड में हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल यूनिवर्सिटी के माध्यम से काउंसिलिंग हो रही है। इस दौरान स्वतंत्रता सेनानी कोटे से जारी फर्जी प्रमाणपत्र का मामला उजागर हुआ है। वहीं, फर्जी प्रमाणपत्रों को जारी करने का खुलासा करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी ने कहा कि पिछले 26 साल से यह खेल चल रहा है।
उन्होंने कहा कि 28 नवम्बर 2000 के बाद पहले से आरक्षित जातियों में उपजाति को जोड़कर प्रमाणपत्र जारी करना पूरी तरह से अवैध है, शासन को इन सभी प्रमाणपत्रों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे।
नीट यूजी मामले में फर्जीवाड़े को लेकर जांच में सामने आया है कि चार अभ्यर्थियों ने एक ही व्यक्ति के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र इस्तेमाल किया था, जबकि जिला प्रशासन की संबंधित पंजिका में उस नाम का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रमाणपत्र निरस्त किए गए और एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने चारों छात्रों के दाखिले रद्द कर दिए। पुलिस ने अब मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय ने भविष्य में आरक्षित श्रेणी और मूल निवास जैसे प्रमाणपत्रों के आधार पर होने वाले दाखिलों को जिला प्रशासन से सत्यापन के बाद ही स्थायी करने की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए हैं।



