
देहरादून। कांग्रेस ने किया राष्ट्रव्यापी “छात्रों की गूंज” अभियान शुरू, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक माफिया से संबंधों की जांच की मांग की
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आज राष्ट्रव्यापी “छात्रों की गूंज” अभियान का शुभारंभ किया. यह 40 दिनों का अभियान देश के 28 प्रमुख शहरों में छात्रों, अभ्यर्थियों, कोचिंग हब, कॉलेज कैंपस, पुस्तकालयों और युवा समूहों के बीच चलाया जाएगा.
राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि यह अभियान उन छात्रों और नौकरी अभ्यर्थियों की आवाज है जिनकी मेहनत बार बार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, रिजल्ट में देरी, भर्ती अटकने और एनटीए की नाकामी के कारण बर्बाद हो रही है. छात्र कोई एहसान नहीं मांग रहे. वे सिर्फ निष्पक्ष परीक्षा और तय समय पर भर्ती मांग रहे हैं.

नीट यूजी 2026 ने परीक्षा व्यवस्था पर भरोसे का संकट और गहरा कियाः
भाजपा सरकार ने NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) को पारदर्शिता और सुधार के नाम भारत के छात्रों पर थोपा था, लेकिन यह संस्था आज करोड़ों छात्रों के लिए National Trauma Agency बन चुकी है। देशभर में पिछले वर्षों में लगभग 89 से अधिक पेपर लीक और परीक्षा घोटाले सामने आए, लेकिन आज तक किसी बड़े सरगना, राजनीतिक संरक्षण देने वाले व्यक्ति या पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश नहीं हुआ। गिरफ्तार हुए तो सिर्फ छोटे दलाल और मोहरे, जबकि असली किंगपिन और भाजपाई संरक्षक हमेशा बचते रहे।
NEET UG 2026 का पेपर लीक इस सड़ चुकी व्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण है। लाखों छात्रों ने वर्षों की मेहनत, करोड़ों परिवारों ने अपनी जीवन भर की कमाई दांव पर लगाई, लेकिन परीक्षा फिर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। इस घोटाले के बाद देशभर में 20 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या कर ली,जिसमें देहरादून की रिया थापा ने भी अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी। कई छात्रों ने अपने सुसाइड नोट में व्यवस्था से टूटने और भविष्य के अंधकार का उल्लेख किया।
फिर भी देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने न तो नैतिक जिम्मेदारी ली और न ही इस्तीफा दिया।
हाल में ही एक मीडिया इंटरव्यू पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं स्वीकार किया कि “छात्रों की आत्महत्या के लिए मै जिम्मेदार हूँ, ये व्यवस्था हमनें ही छात्रों को दी”” जब जिम्मेदारी स्वीकार कर ली गई, तो फिर इस्तीफा क्यों नहीं?
अगर 20 से अधिक छात्रों की मौत, लाखों युवाओं का भविष्य और पूरे देश का भरोसा टूटना भी किसी मंत्री को पद छोड़ने के लिए मजबूर नहीं करता, तो जवाबदेही का अर्थ क्या रह जाता है?
प्रीतम सिंह ने कहा कि सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पूरे मुद्दे पर एक शब्द बोलना जरूरी नहीं समझा। जब छात्र सड़कों पर हैं, परिवार बर्बाद हो रहे हैं, आत्महत्याएं हो रही हैं और परीक्षाएं मज़ाक बन चुकी हैं, तब सत्ता की चुप्पी इस बात का प्रमाण है कि युवाओं की पीड़ा उनकी प्राथमिकता नहीं है।
यह लड़ाई केवल NEET की नहीं है। यह लड़ाई उस पूरी शिक्षा व्यवस्था को बचाने की है जो आज ।CU में पहुंच चुकी है। पेपर लीक, भर्ती घोटाले, खाली पद, महंगी कोचिंग व्यवस्था, लगातार टलती परीक्षाएं और बेरोजगारी ने युवाओं का विश्वास तोड़ दिया है। देश का सबसे युवा आज सबसे ज्यादा असुरक्षित भविष्य का सामना कर रहा है।
केंद्र सरकार की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, सीबीआई ने नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में कथित स्रोत और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया. अगर परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति तक कथित रूप से पेपर की पहुंच थी, तो यह बाहरी शरारत नहीं, अंदरूनी नाकामी है।
शिक्षा मंत्री और एनटीए इस संकट की जिम्मेदारी से नहीं बच सकते. जब राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में छात्रों का भरोसा टूटता है, तो जवाबदेही भी राष्ट्रीय स्तर पर तय होनी चाहिए।
पेपर लीक अब अलग अलग घटना नहीं, राष्ट्रीय पैटर्न है।
हाल में ही आयी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 वर्षों में 89 पेपर लीक मामले सामने आए और कम से कम 6.5 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए। जिनमें करीब 48 परीक्षाओं में रीटेस्ट हुआ और 22 परीक्षाएं आयोजित होने से पहले ही रद्द हुईं।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2019 के बाद नीट 2024 को छोड़कर कम से कम 64 बड़ी परीक्षाएं पेपर लीक के आरोपों से प्रभावित हुईं और ये मामले 19 राज्यों में फैले. इनमें 45 सरकारी भर्ती परीक्षाएं थीं और कम से कम 27 परीक्षाएं रद्द या स्थगित हुईं। पेपर लीक एक संगठित नेटवर्क है, जिसमें वेंडर एजेंसियां, प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट चैन, परीक्षा केंद्र, अंदरूनी लोग, बिचौलिए और सॉल्वर गैंग तक की भूमिका बार बार सामने आती रही है। यह सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं है. यह नौकरी का मुद्दा है. यह युवाओं के भविष्य और उनके परिवारों की उम्मीदों का मुद्दा है।
राहुल गाँधी की कोटा रैली से गूंजी देश के छात्रों की पीड़ा..
हाल ही में कोटा में राहुल गांधी ने कुछ आंकड़ों के माध्यम से साबित किया की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था एक “रिजेक्शन सिस्टम” है जिसमे हर 3000 छात्रों में से केवल 1 IAS बनता है, 30 IIT पहुँचते हैं और सिर्फ 180 डॉक्टर बन पाते हैं। बाकी करोड़ों युवाओं को यह व्यवस्था अवसर नहीं, सिर्फ अस्वीकृति देती है।
उन्होंने बताया की जहाँ एक तरफ देश का कुल शिक्षा बजट 1.4 लाख करोड़ है वही सिर्फ 22 लाख NEET छात्रों का कुल खर्च 1.32 लाख करोड़ है
देश की टॉप-5 परीक्षाओं SSC, UPSC, RRB, JEE, NEET का खर्च भारत सरकार के कुल शिक्षा बजट से 3 गुना है।
भारत की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था एक वसूली तंत्र है जिससे निकलने वाले 1000 युवाओं में से सिर्फ 12 बच्चों को फॉर्मल रोजगार मिलता है..
इसीलिए नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी ने राजस्थान के कोटा से “छात्रों की गूंज” राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत की है। यह आंदोलन अब देश के 28 शहरों में छात्रों, अभ्यर्थियों और युवाओं की आवाज बनेगा।
कांग्रेस की तीन मांगें
1. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें. पेपर लीक माफिया, वेंडर एजेंसियों, अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण से उनके संभावित संबंधों की निष्पक्ष जांच हो ।
2. पूरी परीक्षा व्यवस्था का ओवरहॉल हो. एनटीए, पेपर सेटिंग, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्ट, परीक्षा केंद्र, डिजिटल सिस्टम और वेंडर कॉन्ट्रैक्ट की जांच हो और हर चरण को सुरक्षित किया जाए।
3. तय वार्षिक परीक्षा और भर्ती कैलेंडर लागू हो. परीक्षा तिथि, रिजल्ट तिथि और नियुक्ति समयसीमा पहले से घोषित हों और उनका सख्ती से पालन हो ।



