
देहरादून। सामाजिक कार्यकर्ता एवं भूमि स्वामी सूरत सिंह नेगी ने भूमि रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और राजस्व अभिलेखों से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद एक प्रेस बयान जारी करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच तथा दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
सूरत सिंह नेगी ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज किया गया मुकदमा तथ्यों के विपरीत तथा राजनीतिक दबाव का परिणाम था। उन्होंने कहा कि न्यायालय के समक्ष वास्तविक दस्तावेज और तथ्य प्रस्तुत होने के बाद उन्हें राहत मिली, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मामले में कई महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की गई थी।
नेगी ने आरोप लगाया कि भूमि अभिलेखों में कई गंभीर विसंगतियां मौजूद हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार विनय खुराना ने 2590 वर्ग मीटर भूमि की रजिस्ट्री कराई गई थी, जबकि दाखिल-खारिज में 3066 वर्ग मीटर भूमि दर्ज हो गई। इसी प्रकार सुनयना खुराना ने 2772 वर्ग मीटर भूमि की रजिस्ट्री कराई गई, लेकिन प्रारंभिक दाखिल-खारिज में उनके नाम केवल 2296 वर्ग मीटर भूमि दर्ज की गई।
उन्होंने कहा कि 21 फरवरी 2026 को संबंधित प्राधिकारी द्वारा संशोधित आदेश पारित किया गया था, जिसके बाद भूमि संबंधी स्थिति स्पष्ट हो चुकी थी। इसके बावजूद राजस्व विभाग के अधिकारी आज तक उक्त आदेश को राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं कर रहे हैं। नेगी ने आरोप लगाया कि सक्षम प्राधिकारी के आदेश को लागू न किया जाना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला है ।
सूरत सिंह नेगी ने कहा कि वर्ष 2021 में उन्होंने एवं मोहित पंवार ने लगभग 7 बीघा भूमि खरीदी थी, लेकिन दाखिल-खारिज में उनके नाम 476 वर्ग मीटर भूमि कम दर्ज हुई। उनका कहना है कि इसी प्रकार की विभागीय त्रुटियों ने बाद में कई विवादों को जन्म दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा 23 मई 2026 को पुलिस को लिखित रूप से विवाद समाप्त होने की जानकारी देने के बावजूद 10 जून 2026 को उनके और मोहित पंवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। नेगी के अनुसार यह कार्रवाई कई गंभीर सवाल खड़े करती है और इसकी भी जांच होनी चाहिए।
सूरत सिंह नेगी ने मांग की कि पूरे मामले में कथित रूप से गलत रिपोर्ट तैयार करने वाले राजस्व विभाग के कर्मचारियों, तथ्यों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों तथा बिना पर्याप्त आधार के कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच कर उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
प्रेस विज्ञप्ति में सूरत सिंह नेगी ने रायपुर विधानसभा क्षेत्र की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जनहित के मुद्दों को उठाने वाले लोगों के खिलाफ लगातार उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
नेगी ने कहा कि रायपुर विधानसभा में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को विभिन्न प्रकार के दबावों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित के मुद्दों को उठाने वालों को डराने और हतोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
उन्होंने घोषणा की कि शीघ्र ही रायपुर विधानसभा क्षेत्र में व्यापक “न्याय यात्रा” निकाली जाएगी। इस यात्रा के माध्यम से क्षेत्र की देवतुल्य जनता के समक्ष पूरे प्रकरण से संबंधित दस्तावेज, तथ्य एवं घटनाक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जनता को यह बताया जाएगा कि किस प्रकार विभिन्न स्तरों पर कथित अनियमितताएं हुईं और किस प्रकार जनहित के मुद्दों को दबाने का प्रयास किया गया।
सूरत सिंह नेगी ने कहा, “हम लोकतांत्रिक तरीके से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे। जनता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है और हम देवतुल्य जनता के समक्ष पूरे मामले की सच्चाई रखेंगे। सत्य और न्याय की इस लड़ाई को किसी भी दबाव से रोका नहीं जा सकता।”
पत्रकार वार्ता के दौरान पार्षद अमित भंडारी ,पार्षद रोबिन त्यागी ,पार्षद महेंद्र रावत ,ब्लॉक अध्यक्ष सरिता बिष्ट ,अजबपुर के ब्लॉक अध्यक्ष संजय उनियाल ,वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय प्रताप मल्ल ,एडवोकेट चंद्र मोहन कंडारी ,रिपु दमन सिंह ,विजय गुप्ता ,मनीष सेनन,अनीश उपाध्याय,विनीत प्रसाद भट्ट (बंटू) ,एडवोकेट निलय रत्न कुकरेती ,देवानंद मैथानी ,मिथिलेश उपाध्याय पूर्व प्रधान राजेश डोगरा उपस्थित थे ।



