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देहरादून : दलित सम्मान के नाम पर कांग्रेस कर रही है समाज को बांटने की राजनीति : अजय टम्टा

बिना प्रमाण भाजपा को कटघरे में खड़ा करना राहुल गांधी की राजनीतिक हताशा

देहरादून। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने राहुल गांधी द्वारा हल्द्वानी की घटना को लेकर भाजपा पर लगाए जा रहे आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राहुल गांधी को राजनीति करने से पहले तथ्यों की जानकारी हासिल करनी चाहिए। किसी स्वतंत्र सामाजिक संस्था के कार्यक्रम को बिना ठोस प्रमाण के भाजपा से जोड़कर पूरे संगठन को कठघरे में खड़ा करना राजनीतिक हताशा को दर्शाता है।
टम्टा ने कहा कि यदि कांग्रेस के पास इस कार्यक्रम को भाजपा से जोड़ने का कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए। कार्यक्रम का आयोजक कौन था, उसका भाजपा से क्या आधिकारिक संबंध था और किस आधार पर पूरे भाजपा संगठन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, राहुल गांधी को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। केवल बयान देने से कोई आरोप तथ्य नहीं बन जाता।
उन्होंने कहा कि हल्द्वानी का शुद्धीकरण कार्यक्रम श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से आयोजित किए जाने की बात सामने आई है और संस्था ने भाजपा से किसी आधिकारिक संबंध से इनकार किया है। इसके बावजूद राहुल गांधी द्वारा इसे भाजपा की विचारधारा से जोड़ना तथ्यों की अनदेखी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट द्वारा किसी घटना पर प्रतिक्रिया देना भी कार्यक्रम के आयोजन में भाजपा की भूमिका का प्रमाण नहीं हो सकता। राजनीतिक प्रतिक्रिया और कार्यक्रम का आयोजन दो अलग विषय हैं।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने इस घटना को अपराध, दलित विरोधी मानसिकता और भाजपा की कथित विचारधारा से जोड़ने का प्रयास किया है। इतने गंभीर आरोपों के लिए ठोस तथ्य और प्रमाण आवश्यक हैं। किसी घटना की जिम्मेदारी राजनीतिक भाषण के आधार पर तय नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि SC-ST Act का नाम लेकर पूरे मामले को राजनीतिक रंग देना भी उचित नहीं है। कानून का उल्लेख करने और उसके तहत अपराध सिद्ध होने के बीच स्पष्ट अंतर है। कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि इस मामले में SC-ST Act के तहत अपराध बनने का ठोस कानूनी आधार क्या है।
टम्टा ने कहा कि कांग्रेस द्वारा इस घटना को श्री मल्लिकार्जुन खड़गे की दलित पहचान से जोड़ना भी गंभीर आरोप है। यदि कांग्रेस के पास इसके समर्थन में प्रमाण हैं तो उन्हें जनता के सामने रखना चाहिए। वहीं आयोजक संस्था ऐसी मंशा से इनकार कर रही है। संस्था ने कार्यक्रम के पीछे श्री खड़गे की रैली में लगाए गए कथित आपत्तिजनक नारों और कथित हिंदू विरोधी तत्वों की मौजूदगी के विरोध को कारण बताया है। कांग्रेस को इन दावों पर भी अपना स्पष्ट पक्ष रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दलित सम्मान किसी एक राजनीतिक दल की बपौती नहीं है। दलित समाज को राजनीतिक वोट बैंक के रूप में देखने के बजाय उसके सम्मान और अधिकारों की बात होनी चाहिए। हर विवाद को दलित बनाम भाजपा के रूप में प्रस्तुत करना सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि समाज को राजनीतिक आधार पर बांटने का प्रयास है।
टम्टा ने कहा कि कांग्रेस को अपने राजनीतिक आचरण पर भी विचार करना चाहिए। रुद्रपुर में समाज विशेष द्वारा कथित धमकी प्रकरण पर कांग्रेस की चुप्पी सवाल खड़े करती है। यदि कांग्रेस वास्तव में भय और धमकी की राजनीति के खिलाफ है तो उसे हर मामले में समान रूप से स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। सिद्धांत राजनीतिक सुविधा के अनुसार नहीं बदलने चाहिए।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस स्थानीय विवाद में घसीटना राजनीतिक अतिशयोक्ति है। जिस कार्यक्रम को भाजपा का आधिकारिक कार्यक्रम तक साबित नहीं किया जा रहा है, उसे प्रधानमंत्री से जोड़ना केवल राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास है। उत्तराखंड की जनता ऐसी राजनीति से ऊपर उठकर विकास और सामाजिक सौहार्द की राजनीति चाहती है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर राजनीति करने से पहले अपने इतिहास पर भी विचार करना चाहिए। वर्ष 1952 से 1954 के चुनावों में बाबासाहेब के साथ कांग्रेस के राजनीतिक व्यवहार से लेकर वर्ष 1990 में उन्हें भारत रत्न दिए जाने तक कांग्रेस से कई सवाल जुड़े हैं। आज भाजपा पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि बाबासाहेब को भारत रत्न देने में इतनी लंबी देरी क्यों हुई।
टम्टा ने कहा कि भाजपा का रुख स्पष्ट है। जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है। दलित सम्मान भाजपा के लिए चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सभी वर्गों के सम्मान के संकल्प का हिस्सा है। भाजपा सबका साथ, सबका विकास और सबका सम्मान के सिद्धांत पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को आरोप लगाने से पहले अपने आरोपों की बुनियाद स्पष्ट करनी चाहिए। पहले प्रमाण दें, फिर आरोप लगाएं। उत्तराखंड को जातीय और राजनीतिक ध्रुवीकरण नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, विकास और सभी वर्गों के सम्मान की राजनीति चाहिए।

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