
देहरादून। एक देश, एक चुनाव’ की व्यवस्था को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने विरोध जताया है। कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना लोकतांत्रिक और संघीय व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उनके मुताबिक, चुनाव केवल सरकार बनाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता को सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करने और अपनी आवाज उठाने का संवैधानिक अधिकार भी देते हैं।
गरिमा ने कहा कि केंद्र और राज्यों के मुद्दे और राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। ऐसे में जनता को अपनी जरूरत और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग समय पर सरकार चुनने का अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी राज्य की चुनी हुई सरकार बहुमत खो देती है या किसी अन्य संवैधानिक परिस्थिति में विधानसभा भंग हो जाती है, तो एक तय चुनावी चक्र बनाए रखने के लिए नई सरकार के चुनाव में देरी करना गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े करेगा।
गरिमा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि असली मुद्दा चुनावों की संख्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र की गुणवत्ता है। उन्होंने कहा कि सरकार को चुनावों से नहीं, बल्कि अपनी नीतियों और कामकाज से जनता के सवालों का सामना करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनावी सुधारों के खिलाफ नहीं है, लेकिन सुधार ऐसे होने चाहिए जिनसे मतदान का अधिकार, राज्यों की स्वायत्तता और संविधान का संघीय ढांचा कमजोर न हो। कांग्रेस की प्राथमिकता मजबूत लोकतंत्र, मजबूत संघीय व्यवस्था और जनता के अधिकारों की रक्षा है।



