अपराधउत्तराखंडयूथराजनीतिसामाजिक

नार्को टेस्ट की सहमति के बाद भी अभिनेत्री उर्मिला की गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने उठाये सवाल

अंकिता के असली दोषियों को बचाने के लिए भाजपा का नया प्रपंच

देहरादून। अंकिता भंडारी प्रकरण में संलिप्त वीआईपी को बचाने के लिए भाजपा ने नया प्रपंच रच कर उर्मिला सनावर को नार्को टेस्ट से दूर रखने के लिए उसके विरुद्ध एक दर्जन फर्जी मुकदमे दर्ज करवा कर जेल भेज दिया है। यह आरोप लगाते हुए उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भाजपा को इस बात का भय सता रहा है कि नार्को टेस्ट में उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर ने अगर अंकिता भंडारी प्रकरण में संलिप्त वीआईपी के नाम का खुलासा कर दिया, तो न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश की राजनीति में तूफान आ जाएगा।
उन्होंने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस की ‘न्याय यात्रा’ को जिस प्रकार पूरे प्रदेश में जनसमर्थन मिल रहा है, उससे भाजपा में खलबली मची हुई है और इसी कारण उर्मिला सनावर को साजिश के तहत जेल में डाला गया है।
धस्माना ने मांग की कि सीबीआई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कैसी भी परिस्थिति में उर्मिला सनावर व सुरेश राठौर का नार्को टेस्ट करवाया जाए, क्योंकि सच सामने आए बिना अंकिता को न्याय नहीं मिल सकता।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अंकिता के असली गुनहगार वीआईपी को बचाने के लिए लगातार षड्यंत्र कर रही है, लेकिन कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक इस लड़ाई को जारी रखेगी और अंकिता को न्याय दिलाकर रहेगी।

उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने इस घटनाक्रम ने अनेक गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने 23 अक्टूबर को अदालत में नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सहमति दी थी। आज 26 अक्टूबर को इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया होनी थी, लेकिन उससे ठीक पहले 25 अक्टूबर को उन्हें एक अलग मामले में गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

गरिमा ने कहा कि हम धामी सरकार से सीधे सवाल पूछना चाहते हैं।
पहला सवाल: जब उर्मिला सनावर ने नार्को टेस्ट के लिए सहमति दे दी थी और कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों की जांच चल रही थी, तो उनकी गिरफ्तारी के समय को लेकर उठ रहे सवालों का सरकार क्या जवाब देगी?
दूसरा सवाल: क्या सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इस गिरफ्तारी के कारण अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी की भूमिका की जांच किसी भी तरह प्रभावित न हो?
तीसरा सवाल: उत्तराखंड की जनता यह जानना चाहती है कि अंकिता भंडारी के माता-पिता जिस न्याय के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, उस न्याय की राह में उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा?
चौथा सवाल: यदि उर्मिला सनावर के विरुद्ध किसी अन्य मामले में शिकायत दर्ज हुई है, तो कानून के अनुसार उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लेकिन क्या उस मामले की जांच और अंकिता हत्याकांड से जुड़े सवालों की जांच को पूरी तरह स्वतंत्र एवं पारदर्शी रखने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है?
पांचवां सवाल: क्या धामी सरकार जनता को भरोसा दिलाएगी कि किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक प्रभाव के कारण संरक्षण नहीं मिलेगा और न ही किसी के विरुद्ध कार्रवाई का इस्तेमाल किसी दूसरे मामले में उठ रहे सवालों से ध्यान हटाने के लिए होने दिया जाएगा?
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा की अंकिता भंडारी कोई सामान्य मामला नहीं है। यह उत्तराखंड की बेटी को न्याय दिलाने का सवाल है। इस मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर जो प्रश्न उठाए गए हैं, उनका जवाब पारदर्शी जांच से मिलना चाहिए।
धामी सरकार याद रखे कि गिरफ्तारी से सवाल खत्म नहीं होते। न्यायिक हिरासत से सवाल खत्म नहीं होते। सवालों का अंत केवल निष्पक्ष जांच और सच सामने आने से होगा।
उत्तराखंड की जनता जानना चाहती है कि अंकिता को न्याय कब मिलेगा, कथित वीआईपी से जुड़े सवालों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी और इस पूरे प्रकरण में सरकार की जवाबदेही क्या है।
अंकिता को न्याय मिलना चाहिए। सच सामने आना चाहिए। दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं होना चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button