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बदरीनाथ धाम प्रकरण ने खोल दी भाजपा के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के खोखले दावों की पोल : धस्माना

सत्ता के लिए न तो धर्म की मर्यादा का ख्याल रखते हैं और न ही सेना के सम्मान का

देहरादून | प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने बदरीनाथ धाम में हुए सांस्कृतिक महोत्सव के नाम पर डीजे और अश्लील नृत्य के आयोजन को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह प्रकरण भाजपा के सनातन धर्म और राष्ट्रवाद के ठेकेदार होने के झूठे दावे की पूरी तरह पोल खोलता है।
धस्माना ने कहा कि 19 और 20 सितंबर को बदरीनाथ धाम के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में आयोजित दो दिवसीय ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव’ में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं मौजूद थे। धाम की मर्यादा के विपरीत तेज आवाज में डीजे पर संगीत और नृत्य का कार्यक्रम हुआ, जिस पर भाजपा के ही वरिष्ठतम नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कड़ी आपत्ति जताई।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब पूरे देश में इस कृत्य की निंदा हुई तो राज्य सरकार के इशारे पर चमोली जिला प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए इसका ठीकरा भारतीय सेना पर फोड़ दिया, जो अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है।

धस्माना ने दस्तावेजों के हवाले से कहा –
1. यह महोत्सव सेना के ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत जिला प्रशासन और उत्तराखंड पर्यटन विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया था, लेकिन इसका मुख्य समन्वयक प्रशासन ही था।
2. जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार ने 8 सितंबर को आदेश जारी कर मुख्य विकास अधिकारी चमोली को इस महोत्सव के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया था। आदेश में स्पष्ट लिखा था- 19 और 20 सितंबर 2026 को बदरीनाथ में प्रस्तावित देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2026 को सफलतापूर्वक आयोजित किया जाए और आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।”
3. 9 सितंबर को डीएम कार्यालय द्वारा जारी पत्र में 11 अगस्त को गढ़वाल स्काउट्स, जोशीमठ के कमांडिंग ऑफिसर के पत्र का हवाला देते हुए 10 सितंबर को सीडीओ की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई थी।

धस्माना ने कहा यह भाजपा सरकार का दोहरा चरित्र है। गलती खुद करो और बदनाम सेना को करो। देश से और हिंदू समाज से माफी मांगने के बजाय भाजपा सरकार ने सेना को बलि का बकरा बना दिया। इस पूरे प्रकरण ने साबित कर दिया है कि भाजपा/आरएसएस का हिंदुत्व प्रेम और सेना प्रेम दोनों ही पूरी तरह से खोखले और दिखावटी हैं। सत्ता के लिए वे न तो धर्म की मर्यादा का ख्याल रखते हैं और न ही सेना के सम्मान का।

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