
हरिद्वार। साइबर ठगी का नाम आते ही झारखंड का जामताड़ा लंबे समय से चर्चा में रहा है। समय के साथ साइबर अपराध का यह नेटवर्क दूसरे इलाकों तक फैलता गया और अब बिहार के नालंदा-नवादा क्षेत्र को ‘मगध साइबर गैंग’ के नए हॉटस्पॉट के रूप में देखा जा रहा है। इसी नेटवर्क की कड़ी हरिद्वार तक पहुंचने का खुलासा पुलिस की चेकिंग के दौरान हुआ है।
हरिद्वार पुलिस ने श्यामपुर क्षेत्र में स्विफ्ट कार की चेकिंग के दौरान पांच संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में ATM कार्ड, बैंक पासबुक, सिम, मोबाइल और लैपटॉप बरामद हुए। प्रारंभिक जांच में ₹2.75 करोड़ से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग मिले हैं। पुलिस ने साफ किया है कि बैंक स्टेटमेंट और डिजिटल फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद वास्तविक मनी ट्रेल सामने आएगी।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 35 डेबिट कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 17 SIM कार्ड, 18 मोबाइल फोन और 2 लैपटॉप बरामद किए। इसके अलावा ₹37,500 नकद, ATM कवर, पैन कार्ड और अन्य डिजिटल सामग्री भी मिली।
बरामद पासबुक में Central Bank of India, SBI, Indian Overseas Bank, Bank of Maharashtra, Indian Bank और The Nainital Bank समेत कई बैंकों के खातों की जानकारी मिली। वहीं ATM कार्डों में PNB, Canara Bank, HDFC Bank, Bank of Baroda, Union Bank और Central Bank समेत कई बैंकों के कार्ड शामिल हैं।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से हासिल रकम अलग-अलग बैंक खातों में पहुंचाई जाती थी। इसके बाद रकम को UPI और अन्य खातों के जरिए ट्रांसफर कर ATM/CDM से निकाला जाता था। बरामद मोबाइलों की WhatsApp चैट में बैंक खातों, QR कोड और लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस ने 5 आरोपियों कृष्णा पाण्डे, निरंजन कुमार, चन्द्रमणि कुमार, सन्नी, चन्दन पाण्डे को गिरफ़्तार कर लिया है |
SSP ने किया लोगों को सतर्क
हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने साइबर अपराध के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि साइबर अपराधी देश के किसी भी हिस्से में छिपे हों, पुलिस उनके नेटवर्क तक पहुंचकर कार्रवाई करेगी। उन्होंने लोगों से साइबर ठगी से बचने के लिए अपने बैंक खाते, ATM कार्ड, PIN, OTP और SIM की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करने की अपील की।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS और IT Act के तहत कार्रवाई की है। बरामद मोबाइल और लैपटॉप की जांच के साथ बैंक खातों की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री खंगाली जा रही है। पुलिस का फोकस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और म्यूल अकाउंट धारकों तक पहुंचने पर है।



