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ओलंपिक की मेजबानी के लिए जयघोष के बीच जारी रही खेल मंत्री की कांवड़ यात्रा

हरिद्वार। भारत को वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी दिलाने और देश को खेल महाशक्ति बनाने के संकल्प के साथ उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने कांवड़ यात्रा शुरू की। 22 किलोमीटर लंबी यह विशेष कांवड़ यात्रा हरिद्वार की पावन धरती से शुरू हुई। हर की पौड़ी से विधिवत संकल्प लेकर गंगाजल उठाने के साथ शुरू हुई यह यात्रा भारी बारिश के बीच भी लगातार जारी रही। मौसम ने कई बार परीक्षा ली, लेकिन खेल मंत्री रेखा आर्या और उनके साथ चल रहे हजारों खिलाड़ियों, एथलीटों, युवाओं, महिलाओं, खेल प्रेमियों और आम नागरिकों के कदम संकल्प से पीछे नहीं हटे। हर-हर महादेव, भारत माता की जय और जय देवभूमि के नारों से समूचा क्षेत्र गुंजायमान हो गया।

गंगाजल लेकर निकली कांवड़ यात्रा ने हरिद्वार से ऋषिकेश तक भक्ति, राष्ट्रभक्ति और खेल चेतना से सराबोर दिखाई दी। यात्रा के दौरान जगह-जगह लोगों ने पुष्पमालाओं और पुष्पवर्षा से कांवड़ यात्रा के साथ खेल मंत्री का स्वागत किया।

इस अवसर पर हरिद्वार के साधु-संतों का भी विशेष सहयोग और सानिध्य रहा। संतों ने यात्रा के उद्देश्य के प्रति अपना आशीर्वाद देते हुए इसे देवभूमि से देश के लिए उठाया गया सकारात्मक और प्रेरणादायी संकल्प बताया।

कांवड़ यात्रा में पंच दशनाम जूना अखाड़ा के संरक्षक एवं अंतरराष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरि महाराज तथा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज का भी विशेष सानिध्य और सहभागिता रही। संत-समाज की मौजूदगी ने यात्रा को धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की।

हर पांच किलोमीटर पर बनाए गए चार पड़ाव-
22 किलोमीटर लंबी इस विशेष कांवड़ यात्रा को व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के लिए लगभग हर पांच किलोमीटर के अंतराल पर चार प्रमुख पड़ाव बनाए गए थे। इन पड़ावों पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, खिलाड़ियों, युवाओं और खेल प्रेमियों ने खेल मंत्री और यात्रा में शामिल लोगों का स्वागत किया। कई स्थानों पर युवा और महिलाएं नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुए। यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, रास्ते में स्थानीय लोग भी यात्रा का हिस्सा बनते गए।

हजारों खिलाड़ियों और एथलीटों ने लिया हिस्सा-
इस विशेष कांवड़ यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें केवल धार्मिक आस्था से जुड़े लोग ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में खिलाड़ी, एथलीट, युवा, महिलाएं, खेल प्रेमी और आम नागरिक भी शामिल हुए। उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े खिलाड़ियों ने यात्रा में भाग लेकर भारत को खेल महाशक्ति बनाने के संकल्प के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। खिलाड़ियों की मौजूदगी ने इस यात्रा को विशिष्ट पहचान दी।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि उत्तराखंड की धरती ने हमेशा देश को ऐसे खिलाड़ी दिए हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। देवभूमि की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश में खेलों के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। भारत के खिलाड़ी जिस आत्मविश्वास और मेहनत के साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बना रहे हैं, वह इस बात का संकेत है कि भारत आने वाले वर्षों में खेलों की बड़ी शक्ति बन सकता है।

वीरभद्र मंदिर में जलाभिषेक के साथ संकल्प को समर्पित की यात्रा-
हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर ऋषिकेश के पावन वीरभद्र मंदिर में भगवान भोलेनाथ के चरणों में अर्पित किया गया। यहां जलाभिषेक के साथ भारत को वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिलने और देश को खेलों के क्षेत्र में विश्व की अग्रणी शक्ति बनाने का संकल्प दोहराया गया।

धर्म, राष्ट्र और खेल चेतना का संगम बनी यात्रा-
रेखा आर्या ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदैव देश के बड़े संकल्पों को ऊर्जा देने वाली भूमि रही है। यह कांवड़ यात्रा इसी परंपरा का हिस्सा है। एक ओर कांवड़ यात्रा भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर इसमें भारत को खेल महाशक्ति बनाने का संकल्प जोड़ा गया। इस तरह यह यात्रा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्र निर्माण और खेल चेतना का संगम बन गई।

संतों के आशीर्वाद और जनता के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा अभियान-
रेखा आर्या ने कहा कि संतों का आशीर्वाद देवभूमि के लिए हमेशा ऊर्जा का स्रोत रहा है। महंत हरि गिरि महाराज और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज सहित संत-समाज की सहभागिता ने इस संकल्प को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान की है। यह यात्रा किसी एक व्यक्ति की यात्रा नहीं है। यह खिलाड़ियों, युवाओं, महिलाओं, संतों और आम नागरिकों की सामूहिक यात्रा है। भारत को खेल महाशक्ति बनाने और 2036 ओलंपिक की मेजबानी हासिल करने का संकल्प भी सामूहिक है।

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