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बेंगलुरु : IAF की बड़ी ताकत। स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम ‘नेत्रा’ के लिए मिली फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस

बेंगलुरु। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) ने भारतीय वायु सेना (IAF) को स्वदेशी ‘नेत्रा’ एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम का ‘फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस’ (FOC) सर्टिफ़िकेट सौंपकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस सिस्टम को IAF, DRDO और संबंधित उद्योगों के आपसी सहयोग से स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है, ताकि हवाई निगरानी, हालात की समझ और युद्ध प्रबंधन की क्षमता को काफी बेहतर बनाया जा सके। यह एडवांस्ड एयरोस्पेस और डिफेंस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। शुरुआती ऑपरेशनल मंज़ूरी (IOC) 2017 में दी गई थी।
बेंगलुरु, कर्नाटक में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता एयर स्टाफ़ के डिप्टी चीफ़, एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने की। इस कार्यक्रम में एयर स्टाफ़ के पूर्व प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल आरकेएस भदौरिया (रिटायर्ड), DRDO के पूर्व चेयरमैन डॉ. एस. क्रिस्टोफर, IAF के मौजूदा और रिटायर्ड सीनियर अधिकारी, CABS (सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम) की डायरेक्टर और बेहतरीन वैज्ञानिक श्रीमती पी. संथ्या, बेहतरीन वैज्ञानिक और चीफ़ एग्जीक्यूटिव (एयरवर्दीनेस) श्री एपीवीएस प्रसाद, वैज्ञानिक ‘G’ और NETRA FOC के हेड श्री एएस कुमारन, DRDO के अन्य सीनियर अधिकारी और इंडस्ट्री पार्टनर शामिल हुए।


एयर स्टाफ़ के डिप्टी चीफ़ ने कहा कि स्वदेशी Netra AEW&C के FOC की तारीफ़ की। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘बालाकोट स्ट्राइक’ के दौरान इस सिस्टम के ऑपरेशनल इस्तेमाल और भरोसेमंद होने के बारे में बात की। उन्होंने स्वदेशी टेक्नोलॉजी के महत्व पर ज़ोर दिया, जो सेनाओं को बदलते युद्ध के हालात के हिसाब से सिस्टम में बदलाव करने की सुविधा देती हैं। उन्होंने DRDO, IAF और इंडस्ट्री के बीच बेहतर तालमेल की तारीफ़ की, जिसने इस प्रोग्राम की सफलता में अहम भूमिका निभाई।
DRDO के एयरोनॉटिक्स क्लस्टर की डायरेक्टर जनरल और बेहतरीन वैज्ञानिक डॉ. के. राजलक्ष्मी मेनन ने NETRA के सफल सफ़र के बारे में बताया। उन्होंने उन चुनौतियों और लिए गए फ़ैसलों का ज़िक्र किया जिनकी वजह से प्रोग्राम के लक्ष्यों को हासिल करना और IAF को ऑपरेशन के लिए तैयार सिस्टम सौंपना मुमकिन हो सका। उन्होंने सिस्टम इंजीनियरिंग के महत्व पर ज़ोर दिया और बताया कि कैसे इसने फ़्लाइट-टेस्ट की प्लानिंग और उन्हें पूरा करने में मदद की।
DRDO के इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर के डायरेक्टर जनरल और बेहतरीन वैज्ञानिक डॉ. बीके दास ने कहा कि सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच बेहतर तालमेल ही इस प्रोग्राम की सफलता का आधार रहा है। उन्होंने Netra AEW&C को आत्मनिर्भरता और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की एक अहम मिसाल बताया।

मुख्य योगदानकर्ताओं का सम्मान
इस कार्यक्रम के तहत, उन संगठनों और इकाइयों की विशेष सराहना और सम्मान किया गया जिन्होंने ‘नेत्रा AEW&C’ सिस्टम को सफलतापूर्वक बनाने और चालू करने में अहम भूमिका निभाई। इस सिस्टम को केवल एक विचार से असल में काम करने वाली प्रणाली में बदलने में सभी संबंधित पक्षों के योगदान को महत्वपूर्ण माना गया।

स्वदेशी क्षमता विकास में एक अहम उपलब्धि
‘नेत्रा AEW&C’ सिस्टम का ऑपरेशनल सर्विस में सफल शामिल होना, रक्षा सेवाओं के लिए स्वदेशीकरण, इनोवेशन और क्षमता बढ़ाने के प्रति DRDO की प्रतिबद्धता को दिखाता है। यह कार्यक्रम ऑपरेशनल यूज़र्स, वैज्ञानिक एजेंसियों और रक्षा उत्पादन संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल का एक शानदार उदाहरण है।

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