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सुप्रीम कोर्ट के सीलिंग आदेश की आड़ में छोटे दुकानदारों पर बुलडोजर नहीं चलने देंगे : आप

सरकार छोटे व्यापारियों को संरक्षण दे, उत्पीड़न नहीं

देहरादून। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आवासीय क्षेत्रों में बड़े अवैध निर्माण और सुनियोजित व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों को रोकने के लिए है, लेकिन प्रदेश सरकार और नगर निकाय उसकी आड़ में उन छोटे दुकानदारों, गरीब परिवारों और माताओं-बहनों के रोजगार पर ताला लगा रहे हैं जो अपने ही छोटे निजी भवन के एक कोने में 10×10 की दुकान चलाकर अपने बच्चों का पेट पाल रहे हैं।
आप महानगर अध्यक्ष देहरादून संजय क्षेत्री ने कहा कि हम स्पष्ट कहना चाहते हैं कि हम कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन कानून गरीब को कुचलने के लिए नहीं होता।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का सच सरकार जानती है। यहाँ पहाड़ से लेकर दून तक न कोई बड़ा बाजार है, न रोजगार। एक परिवार अपना मकान बनाता है, उसी में नीचे एक छोटी सी परचून, नाई, दर्जी, मोबाइल रिपेयर, चाय की दुकान खोल लेता है ताकि मकान की मेंटिनेंस निकल जाए और घर चल जाए। ये अतिक्रमण नहीं, ये मजबूरी और आत्मनिर्भरता है। इन्हें बड़े बिल्डरों और अवैध कॉम्प्लेक्सों के साथ एक तराजू में तोलना अन्याय है।
उन्होंने कहा कि देहरादून के पीड़ित छोटे दुकानदार भाइयों-बहनों को भरोसा दिलाता हूँ कि आप अकेले नहीं हैं। आम आदमी पार्टी आपके साथ खड़ी है।
उन्होंने कहा कि हमारी मांग है की सरकार तत्काल नीति लाए: 20 साल से अधिक पुराने आवासीय क्षेत्रों में जहाँ स्वाभाविक रूप से छोटी दुकानें विकसित हो गई हैं, उन्हें “मिश्रित उपयोग (Mixed Land Use)” घोषित किया जाए, जैसा दिल्ली में हमारी सरकार ने किया था।
छोटे दुकानदारों के लिए राहत: 50 वर्ग मीटर तक के निजी भवन में चलने वाली, बिना किसी प्रदूषण और बिना सार्वजनिक बाधा वाली दुकानों को सीलिंग से छूट दी जाए और एकमुश्त नियमितीकरण शुल्क लेकर ट्रेड लाइसेंस दिया जाए।
चुनिंदा कार्रवाई बंद हो: सुप्रीम कोर्ट ने खुद “Pick & Choose” पर रोक लगाई है। सरकार पहले बड़े अवैध कॉम्प्लेक्स और प्रभावशाली लोगों के अवैध निर्माण पर कार्रवाई करे, गरीब की रोजी-रोटी पर नहीं।
6 महीने का समय और पुनर्वास: किसी भी सीलिंग से पहले 6 महीने का नोटिस और वैकल्पिक व्यवस्था का मौका दिया जाए।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जहाँ उपयोग स्पष्ट नहीं है, वहाँ यथास्थिति बनी रहेगी। हम सरकार से कहते हैं, इस भावना को समझिए।
जनता से अपील है कि डरें नहीं, अपने कागज, बिजली बिल, किरायानामा और पुरानी फोटो संभाल कर रखें। हमारी कानूनी टीम देहरादून महानगर में पीड़ित दुकानदारों की मदद के लिए हेल्प डेस्क लगाएगी। यदि सरकार ने छोटे दुकानदारों का उत्पीड़न बंद नहीं किया, तो आम आदमी पार्टी सड़क से लेकर सदन तक इस लड़ाई को लड़ेगी।

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