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बेबुनियाद आरोपों की राजनीति कर रही कांग्रेस, तथ्यों और समाधानों पर मौन : चमोली

आरोपों की आड़ में राजनीति, तथ्यों के मोर्चे पर कांग्रेस कमजोर : बीजेपी

देहरादून। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं धर्मपुर से विधायक विनोद चमोली ने कांग्रेस के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों को एक साथ जोड़कर राजनीतिक माहौल बनाने से कांग्रेस की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। कांग्रेस जिन मामलों को लेकर सवाल उठा रही है, उन पर उसे अपना स्पष्ट दृष्टिकोण और समाधान भी सामने रखना चाहिए। केवल आरोप लगाना और जनता के बीच भ्रम पैदा करना जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं हो सकती।
उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों पर कहा कि कांग्रेस स्पष्ट करे कि वह किन मामलों, दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर सरकार पर सवाल उठा रही है। आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन्हें प्रमाणित करने के लिए ठोस आधार आवश्यक है। विपक्ष को सरकार की नीतियों और फैसलों से असहमति जताने का अधिकार है, लेकिन हर प्रशासनिक निर्णय को भ्रष्टाचार से जोड़ना उचित नहीं है। जनता को आरोपों की राजनीति नहीं, तथ्यों पर आधारित जवाब चाहिए।
चमोली ने भूमि कानून के मुद्दे पर कहा कि कांग्रेस को प्रदेश में लागू प्रावधानों और उनके उद्देश्यों पर बात करनी चाहिए। राज्य सरकार ने भूमि की खरीद-बिक्री को लेकर सख्त व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत पर्वतीय जिलों में बाहरी लोगों के कृषि और उद्यान भूमि खरीदने पर प्रतिबंध संबंधी प्रावधान किए गए हैं। कांग्रेस बताए कि वर्तमान व्यवस्था में उसे कौन-सी ठोस कमी नजर आती है और उसका विकल्प क्या है। केवल आशंकाएं पैदा करने से प्रदेश के हितों की रक्षा नहीं होगी।
खनन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर चमोली ने कहा कि खनन से मिलने वाले राजस्व, अवैध खनन पर कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल पूछे जा सकते हैं, लेकिन बिना किसी विशिष्ट मामले और प्रमाण के पूरे तंत्र पर आरोप लगाना उचित नहीं है। यदि कांग्रेस के पास अनियमितता से जुड़े तथ्य हैं, तो उन्हें सामने रखकर जवाबदेही की मांग करनी चाहिए। केवल आरोपों के आधार पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने से वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं निकलता।
रोजगार और भर्ती परीक्षाओं पर उन्होंने कहा कि धामी सरकार के कार्यकाल में सरकारी नौकरियों में भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून भी बनाया गया है। उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम में दोषियों के लिए कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान है। भर्ती प्रक्रिया में जहां भी अनियमितता हो, वहां कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए उसके पास क्या ठोस सुझाव हैं।
चमोली ने कहा कि पलायन उत्तराखंड के लिए गंभीर विषय है और इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन केवल चिंता जताने के बजाय रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने जैसे उपायों पर ठोस चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस बताए कि पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ाने और गांवों को आबाद रखने के लिए उसके पास क्या व्यावहारिक योजना है। जनता को समस्याएं गिनाने के साथ-साथ समाधान भी चाहिए।

बदरीनाथ धाम प्रकरण में सरकार ने की कार्रवाई, जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय हो जिम्मेदारी
बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और प्रसाद से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर चमोली ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने भी कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारी को निलंबित किया और प्राथमिकी दर्ज कराई। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया, गवाहों के बयान दर्ज किए और जांच के दौरान दो आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई। ऐसे में यह कहना कि सरकार ने मामले को नजरअंदाज किया, तथ्यों के विपरीत है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके विभागों से जुड़े आरोपों पर चमोली ने कहा कि महिलाओं का सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण किसी भी संवेदनशील समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए। महिला सशक्तीकरण के मुद्दे को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित करने के बजाय महिलाओं को न्याय, समान अवसर और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। किसी भी महिला की शिकायत को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और उससे जुड़े मामले में निष्पक्ष जांच तथा नियमानुसार कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, किसी आरोप को जांच पूरी होने से पहले दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जा सकता। कांग्रेस को भी महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के विषय पर राजनीतिक लाभ से ऊपर उठकर तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। महिला सशक्तीकरण केवल नारों से नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा और निर्णय लेने में उनकी भागीदारी को मजबूत करने से सुनिश्चित होता है।

प्रदेश की जनता को राजनीतिक शोर नहीं, ठोस समाधान चाहिए
विनोद चमोली ने कहा कि उत्तराखंड के हितों, युवाओं के रोजगार, भूमि संरक्षण, धार्मिक स्थलों की गरिमा, महिलाओं के सम्मान और कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। भाजपा सरकार तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर जवाबदेही की पक्षधर है।

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